“सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान, प्रेम के नाम पर भरोसे का शोषण, धर्मांतरण का दबाव और विरोध करने पर हिंसा। देश के अलग-अलग राज्यों से सामने आई हाल की घटनाएं महिलाओं की सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और समाज की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं” ।
प्रेम! कितना खूबसूरत शब्द है। विश्वास, समर्पण और जीवनभर साथ निभाने का संकल्प। लेकिन जब इसी प्रेम को छल, धोखे, शोषण और ब्लैकमेलिंग का हथियार बना दिया जाए, तब यह केवल दो व्यक्तियों के रिश्ते का मामला नहीं रह जाता। यह एक गंभीर सामाजिक चुनौती बन जाता है।
भारत की संस्कृति में नारी को शक्ति और देवी का स्वरूप माना गया है, उसी भारत में बेटियों को प्रेमजाल में फंसाने, उनकी धार्मिक पहचान और भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने तथा उन्हें अपनी आस्था बदलने के लिए मजबूर करने जैसी कई घटनाएं सामने आती रहती हैं। कहीं सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाकर दोस्ती की जाती है, कहीं शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण के आरोप लगते हैं, तो कहीं विरोध करने पर हिंसा और हत्या जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं।
सोशल मीडिया बना जंजाल
29 ऑक्टोबर की एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश के कानपुर में लव जिहाद का मामला सामने आया। पुलिस को दी गई शिकायत के अननुसार, बिलाल सलमानी ने अपनी असली पहचान छिपाकर समीर के नाम से करीब छह साल पहले सोशल मीडिया के जरिए दोनों की मुलाकात हुई थी और इसी फर्जी पहचान के सहारे उसका विश्वास जीता। इसके बाद शादी का झांसा देकर लगातार उसका शारीरिक शोषण करता रहा, लेकिन छह साल बीत जाने के बाद भी शादी नहीं की। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की जाती थी और जान से मारने की धमकी दी जाती थी। लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर युवती ने आखिरकार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
इसके एक दिन पहले 28 ऑक्टोबर को भी उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पहचान छिपाकर एक युवती के साथ सात साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने और तीन बच्चे होने के बाद उसे घर से निकालने का मामला सामने आया है। देवरिया की रहने वाली 28 वर्षीय युवती ने धामपुर के हबीबवाला गांव निवासी संदीप उर्फ सलमान पर अपनी असली पहचान और धर्म छिपाकर संबंध बनाने तथा शादी का दबाव डालने पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। पीड़िता के अनुसार, वर्ष 2019 में चंडीगढ़ में उसकी मुलाकात संदीप नाम के युवक से हुई थी। दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे और उनके तीन बच्चे हुए। पहले बच्चे के टीकाकरण के दौरान आधार कार्ड से युवक की असली पहचान सामने आई। युवती को पता चला कि उसका नाम सलमान है और वह जाहिद अहमद का पुत्र है। आरोप है कि शादी का दबाव बनाने पर सलमान ने उसके साथ मारपीट की और तीनों बच्चों को अपने पास रखकर उसे घर से निकाल दिया।
पहले भी कई जगहों पर इस तरह के षड्यन्त्र देखने को मिलते रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 10 अक्टूबर को नई मंडी कोतवाली क्षेत्र में पुलिस ने मुठभेड़ के बाद 25 हजार रुपये के इनामी आरोपी अजरू उर्फ अजहरुद्दीन को गिरफ्तार किया। उस पर इंस्टाग्राम पर अपनी पहचान छिपाकर एक नाबालिग हिंदू लड़की को बहलाने-फुसलाने और उसका धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी एक अन्य लड़की को भी फंसाने की फिराक में था। उसके पास से अवैध तमंचा और कारतूस भी बरामद किए गए।
ठीक इसी तरह गुजरात के अहमदाबाद में पुलिस ने चेन्नई निवासी 23 वर्षीय कासम अंसारी को गिरफ्तार किया है। उस पर भी आरोप है कि उसने इंस्टाग्राम के जरिए 26 वर्षीय हिंदू युवती से दोस्ती की और शादी का झांसा देकर उसे होटल में ले गया। प्राथमिकी के अनुसार, 3 अक्टूबर से 13 अक्टूबर तक आरोपी ने युवती को होटल में बंधक बनाकर रखा और उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। 13 अक्टूबर को पीड़िता किसी तरह वहां से निकलकर घर पहुंची और परिजनों के साथ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
ये तो सोशल मीडिया के माध्यम से हिंदू युवतियों को अपने जाल में फंसाने की घटनाएं हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल सोशल मीडिया के जरिए ही इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है।
महाराष्ट्र के नालासोपारा में 23 वर्षीय हिंदू युवती ने 22 वर्षीय आरिफ अयूब शेख के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। युवती की शिकायत के अनुसार, आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ संबंध बनाए और बाद में कनवर्जन का दबाव डालने लगा। आरोप है कि उसे नाम बदलने और बुर्का पहनने के लिए भी मजबूर किया गया। आरोपी की मां और रिश्तेदारों पर मारपीट तथा बंधक बनाने के आरोप भी लगाए गए हैं। इसी मामले से जुड़े घटनाक्रम में एक जिम में हिंदू धर्म और नवरात्रि को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियों का मामला भी सामने आया। पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
ऐसा देखा गया है कि कई बार परिवार की चिंता और चेतावनी को ही बेटियां अपनी स्वतंत्रता में हस्तक्षेप समझने लगती हैं। लेकिन जब किसी रिश्ते का वास्तविक चेहरा सामने आता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले की एक युवती के लापता होने की शिकायत के बाद जोबट पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि रेहान मकरानी उसे लेकर मुंबई जाने की तैयारी में है। पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए 13 अक्टूबर की रात इंदौर एयरपोर्ट पर सीआईएसेफ और जोबट पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दोनों को इंडिगो की मुंबई जाने वाली फ्लाइट में सवार होने से पहले ही रोक लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।
यहां तो दोनों युवतियां इन जालसाजों के चंगुल से बच निकलीं, लेकिन कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में 30 वर्षीय आशा को अपनी जान गंवानी पड़ी। आशा ने तीन साल पहले इमरान नाम के युवक से प्रेम विवाह किया था और उनका एक बच्चा भी है। 13 अक्टूबर को आशा अपने ही घर में फांसी पर लटकी मिलीं। अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद पति इमरान के फरार हो गया।
आशा के माता-पिता ने आरोप लगाया कि इमरान दहेज के लिए उनकी बेटी को प्रताड़ित करता था। परिजनों के मुताबिक, उन्होंने डेढ़ महीने पहले ही आशा को एक लाख रुपये दिए थे। हिंदू संगठनों ने इस मामले को लव जिहाद से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इस घटना में आशा ने अपनी जान तो गंवा दी, लेकिन उनकी मौत के बाद उनके छोटे से बच्चे का भविष्य भी अब सवालों के घेरे में आ गया है।
इसी तरह की एक और घटना महाराष्ट्र के नागपुर से देखने को मिली । यहाँ भी प्रेम संबंध का अंत एक खौफनाक हत्या के रूप में देखने को मिला। पुलिस के अनुसार, 35 वर्षीय कविता आरोपी जावेद शेख साहिद मन्नियार पर शादी करने का दबाव बना रही थीं। इसी बात से परेशान होकर जावेद ने उनकी हत्या कर दी। इसके बाद हत्या को करंट लगने से हुई मौत दिखाने के लिए आरोपी ने शव के पास इमर्शन हीटर रखकर साजिश रची और ट्रेन से जलगांव फरार हो गया। हालांकि, 14 अक्टूबर को एमआईडीसी पुलिस ने उसे जलगांव से गिरफ्तार कर लिया।
यह भी सच है कि समाज में जागरूकता बढ़ी है। परिवार अपनी बेटियों को समझा रहे हैं, सामाजिक संगठन ऐसे मामलों को उठा रहे हैं और पुलिस भी कई मामलों में कार्रवाई कर रही है। इसके बावजूद यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या हमारी बेटियां पूरी तरह सुरक्षित हैं?
एक घटना उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी देखने को मिली। 14 अक्टूबर को कचहरी परिसर में शरीफ अली नाम का युवक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की को लेकर शादी करने पहुंचा था। वहां एक वकील से कहासुनी के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया। उधर, लड़की के पिता ने कैंट थाने में शिकायत देकर आरोप लगाया कि शरीफ ने उनकी बेटी को झूठे प्रेमजाल में फंसाकर उसका शारीरिक शोषण किया और उसकी इच्छा के विरुद्ध कनवर्जन कराकर निकाह करने की कोशिश की है।
अब सवाल पूरे समाज से
सबसे बड़ा प्रश्न हिंदू समाज के सामने अब भी है कि क्या हम अपनी बेटियों के साथ ऐसा विश्वासपूर्ण रिश्ता बना पाए हैं कि वे किसी भी परेशानी में सबसे पहले अपने परिवार से बात कर सकें? क्या हमने उन्हें डिजिटल दुनिया में छिपे खतरों के प्रति पर्याप्त जागरूक किया है? क्या धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद के नाम पर किसी को धोखा देने, शोषण करने या जबरन धर्मांतरण कराने की कोशिशों को सामान्य मान लिया जाना चाहिए ?
बेटियों की स्वतंत्रता का अर्थ उनकी सुरक्षा से समझौता करना नहीं है। उन्हें अपनी पसंद से जीवन जीने का अधिकार है, लेकिन क्या किसी को भी उस स्वतंत्रता का इस्तेमाल धोखे, ब्लैकमेलिंग या शोषण के लिए करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है?

