रामगढ़, 31 अक्टूबर: चुटूपालू एवं चरही घाटी में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए करीब 240 करोड़ रुपये की सड़क सुरक्षा परियोजना को जल्द धरातल पर उतारने की पहल तेज हो गई है। हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल के निर्देश पर रामगढ़ जिला सांसद प्रतिनिधि राजीव जायसवाल ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय पदाधिकारी से मुलाकात कर परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
बैठक में दोनों घाटियों के दुर्घटना संभावित स्थलों (ब्लैक स्पॉट) के सुधार, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), तकनीकी डिजाइन, वन स्वीकृति और निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई। परियोजना की कुल अनुमानित लागत करीब 240 करोड़ रुपये है, जिसमें लगभग 151 करोड़ रुपये निर्माण कार्यों पर खर्च किए जाएंगे। शेष राशि निर्माण-पूर्व कार्यों और भूमि अधिग्रहण पर खर्च होगी।
राजीव जायसवाल ने चुटूपालू घाटी में चेनज 92+885 से 97+920 तथा चरही घाटी में चेनज 51+540 से 52+500 तक प्रस्तावित सुधार कार्यों की डीपीआर और तकनीकी डिजाइन की स्वतंत्र विशेषज्ञों से समीक्षा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि समीक्षा में पहाड़ी, भू-तकनीकी, वाहन सुरक्षा और हाईवे ट्रैफिक विशेषज्ञों को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर स्थायी समाधान निकाला जा सके।
बैठक में भारी वाहनों के ब्रेक फेल होने और ढलान पर अनियंत्रित होने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए ट्रक एस्केप रैंप, क्रैश बैरियर, बेहतर जल निकासी, चेतावनी संकेतक, रोड मार्किंग, रिफ्लेक्टर और रात्रिकालीन दृश्यता जैसे सुरक्षा उपायों की तकनीकी व्यवहार्यता जांचने का सुझाव दिया गया। साथ ही निर्माण से पहले और बाद में स्वतंत्र रोड सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग भी रखी गई।
राजीव जायसवाल ने बताया कि सांसद मनीष जायसवाल इस गंभीर समस्या को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष भी उठा चुके हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना का उद्देश्य केवल सड़क का तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि यात्रियों और स्थानीय लोगों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए।
बैठक में NHAI के क्षेत्रीय पदाधिकारी ने बताया कि प्रस्तावों को प्राधिकरण स्तर पर स्वीकृति मिल चुकी है। आगे की प्रक्रिया में वन स्वीकृति महत्वपूर्ण है। इस पर राजीव जायसवाल ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक प्रक्रियाएं जल्द पूरी करने का आग्रह किया, ताकि परियोजना में अनावश्यक देरी न हो।

