रांची, 01 सितंबर: मोरहाबादी मैदान में आयोजित ‘आदिवासी एकता महाजुटान’ को लेकर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुवर दास ने कांग्रेस और आयोजन के आयोजकों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि महाजुटान के जरिए कांग्रेस आदिवासी समाज के बीच परिसीमन को लेकर भ्रम फैलाकर अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
रघुवर दास ने कहा कि रैली में कांग्रेस के प्रभारी, मंत्री और विधायक मौजूद रहे तथा राहुल गांधी का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया। इससे आयोजन के राजनीतिक उद्देश्य स्पष्ट होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भीड़ जुटाने में धार्मिक संगठनों और ईसाई मिशनरियों की भूमिका रही तथा सरना आदिवासियों की भागीदारी कम रही। इसके लिए उन्होंने केंद्रीय सरना आदिवासी समिति के विरोध का भी उल्लेख किया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि परिसीमन को लेकर यह प्रचार किया जा रहा है कि आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या घट जाएगी, जबकि अभी तक परिसीमन से संबंधित कोई प्रस्ताव या विधेयक सार्वजनिक नहीं हुआ है। उन्होंने इसे लोगों को भयभीत करने और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश बताया।
उन्होंने महाजुटान को कांग्रेस और झामुमो के बीच राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बताते हुए कहा कि कांग्रेस झामुमो के पारंपरिक जनाधार में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। रघुवर दास ने कांग्रेस के शासनकाल और आदिवासी हितों को लेकर भी सवाल उठाए तथा खरसावां गोलीकांड का जिक्र किया।
आरएसएस को लेकर लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन की पहचान राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और समाजसेवा से है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति से सतर्क रहने की सलाह दी और तमाड़ उपचुनाव समेत पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का स्मरण कराया। उन्होंने कांग्रेस के मुस्लिम लीग से गठबंधन का मुद्दा उठाते हुए पार्टी पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप भी लगाया।

