कोलकाता, 21 मई: कोलकाता हाई कोर्ट ने बकरीद से पहले दायर एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार की अधिसूचना में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि धार्मिक परंपराओं के पालन के नाम पर कानून को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता तथा गाय की कुर्बानी को अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं माना जा सकता।
मामला पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा लागू किए गए पशु वध नियंत्रण नियमों से जुड़ा था, जिसमें बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के गोवंश के वध पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया है। इस आदेश को चुनौती देते हुए कुछ याचिकाएं दाखिल की गई थीं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि इससे ईद-उल-अजहा के धार्मिक आयोजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व्यवस्था, कानून और पशु संरक्षण से जुड़े नियमों का पालन आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कुर्बानी की धार्मिक परंपरा का अर्थ केवल गाय से नहीं जोड़ा जा सकता। इसके बाद याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।
इस फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक और धार्मिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जबकि प्रशासन ने बकरीद के दौरान शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।

