मुंबई, 11 जून: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की चर्चाएं तेज हो गई हैं। वर्ष 2022 में हुई शिवसेना की ऐतिहासिक बगावत के बाद अब ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सात सांसद पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे ‘ऑपरेशन टाइगर’ के नाम से भी जोड़ा जा रहा है।
हालांकि इन अटकलों को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने पार्टी में किसी भी तरह की टूट की संभावना से इनकार करते हुए कहा है कि सभी सांसद उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं और सात सांसदों के टूटने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है।
वहीं, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी पहले ऐसी खबरों को खारिज कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि उद्धव गुट के सांसदों के साथ किसी गुप्त बैठक या संपर्क की खबरें पूरी तरह निराधार और सनसनी फैलाने वाली हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा और निकाय चुनावों के बाद महाराष्ट्र में लगातार बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच दल-बदल की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। हाल के महीनों में कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों के शिंदे गुट में शामिल होने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे इन चर्चाओं को और बल मिला है।
फिलहाल सात सांसदों के संभावित पाला बदलने की खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन अटकलों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ा दी है। यदि ऐसा कोई घटनाक्रम होता है तो यह 2022 के बाद राज्य की राजनीति में सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव माना जाएगा।

