कोलकाता, 18 मई: पश्चिम बंगाल में धर्म आधारित सहायता योजनाओं को लेकर बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आया है। राज्य की नई सरकार ने इमाम, मुअज्जिन और पुरोहितों को दिए जाने वाले सरकारी मानदेय को जून 2026 से बंद करने का निर्णय लिया है। यह योजना वर्ष 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री Mamata Banerjee द्वारा शुरू की गई थी, जिसके तहत राज्य के करीब 30 हजार इमामों को प्रतिमाह मानदेय दिया जाता था। हाल के वर्षों में यह राशि बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह कर दी गई थी।
राज्य सरकार के अनुसार, यह योजना अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग तथा सूचना एवं संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित की जा रही थी। इस पर हर वर्ष लगभग 110 करोड़ से 150 करोड़ रुपये तक का खर्च आता था। नई सरकार का कहना है कि अब कल्याणकारी योजनाएं धार्मिक आधार पर नहीं चलाई जाएंगी।
मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मई महीने तक पुरानी योजनाएं जारी रहेंगी, लेकिन जून से इन्हें चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा।
सरकार ने इसके साथ ही महिलाओं के लिए “अन्नपूर्णा योजना” को मंजूरी दी है, जिसके तहत महिलाओं को प्रतिमाह 3000 रुपये की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा सरकारी बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा सुविधा देने की भी घोषणा की गई है।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को बड़ा बदलाव माना जा रहा है। भाजपा इसे “धर्मनिरपेक्ष प्रशासन” की दिशा में कदम बता रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

