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बच्चों पर हुक्म चलाने का दौर खत्म, घर में ‘डिप्रेशन’ नहीं ‘डिस्कशन’ होना चाहिए: मोहन भागवत

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नागपुर, 25 जुलाई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संवाद को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के समय में बच्चों पर केवल आदेश चलाने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि परिवारों में ऐसा माहौल होना चाहिए, जहां बच्चे खुलकर अपनी बात रख सकें। “घर में डिप्रेशन नहीं, डिस्कशन होना चाहिए” और बच्चों के साथ नियमित संवाद ही उनकी मानसिक मजबूती का आधार बन सकता है।

नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि पहले संयुक्त परिवारों में बच्चों को दादा-दादी और अन्य परिजनों का मार्गदर्शन सहज रूप से मिल जाता था, लेकिन बदलती जीवनशैली और मोबाइल फोन पर बढ़ती निर्भरता के कारण परिवारों के बीच संवाद कम होता जा रहा है। इसका असर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि आज कई माता-पिता बच्चों के रोने या जिद करने पर उनसे बात करने के बजाय मोबाइल फोन थमा देते हैं। इससे बच्चे परिवार से भावनात्मक रूप से दूर होते जा रहे हैं। भागवत ने कहा कि बच्चों को प्रेम, विश्वास और तर्क के साथ समझाने की जरूरत है, केवल डांट-फटकार या आदेश से उनका सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।

संघ प्रमुख ने समाज और परिवारों से अपील की कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, उनके साथ प्रतिदिन समय बिताएं और ऐसा वातावरण बनाएं, जहां वे बिना डर अपनी समस्याएं साझा कर सकें। उनके अनुसार, स्वस्थ और संवादपूर्ण परिवार ही स्वस्थ समाज की नींव होते हैं।

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