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देश जल रहा है और हम मजे में हैं, क्या यह सही है? #SupportCAA

By Rashtra Samarpan Dec 21, 2019
— रितेश कश्यप

देश जल रहा है और हम मजे में क्या यह सही है? देश उबल रहा है और हम अपने घरों में बैठकर टीवी देख रहे हैं और कह रहे हैं सरकार को यह अभी नहीं लाना चाहिए । हम कह रहे हैं सरकार को पहले बेरोजगारी दूर करनी चाहिए थी। हम कह रहे हैं देश का जीडीपी पहले ठीक करना चाहिए था।

इसको एक उदाहरण के साथ समझा जाए। मान लिया जाए की आपके घर में 4 लोग रहते हैं अब दो ऐसे लोग आपके घर में और आ जाते हैं जिनका आपके साथ कोई संबंध नहीं है। आपने मानवता दिखाते हुए उन दोनों को अपने पास रख लिया। कुछ दिनों के बाद आप की स्थिति ऐसी नहीं है कि आप उन दोनों का भार उठा सकें। आपने उन दोनों को कहा कि आप अपने अपने घरों पर चले जाइए। हमें यह भी पता है कि उन दोनों में से एक व्यक्ति अगर वापस जाता है तो उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ सकता है जबकि दूसरा व्यक्ति आराम से अपनी जिंदगी जिएगा।  अब जरा आप ही सोच कर बताइए पहले जब आप ने मानवता दिखाई थी तो अब मानवता क्या कहती है और आपके पास दोनों व्यक्तियों को रखने की क्षमता भी नहीं है।

ऐसा ही कुछ भारत सरकार में नागरिक संशोधन बिल के तहत किया गया है। दो तरह के लोग भारत में प्रवेश किए एक वह लोग जिनका भारत में प्रवेश करना मजबूरी था क्योंकि अगर वह प्रवेश नहीं करते तो या तो उन्हें मार दिया जाता जो उनके अन्य भाइयों के साथ किया जा चुका था, या फिर उनका धर्म परिवर्तन कर दिया जाता। दूसरे उस तरह के लोग प्रवेश किए जो अपनी आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए या किसी रोजगार की तलाश में अपने देश को छोड़कर इस देश में आए या फिर यूं कह सकते हैं लाए गए।

हमें यह पता है कि उन दोनों में से एक जिनका धार्मिक उत्पीड़न हुआ है उन्हें अगर वापस भेजा जाएगा तो यह निश्चित है कि हम उन्हें मौत के कुआं में ढकेल रहे हैं और दूसरे वह लोग जाएंगे जिनका वहां पर बाल बांका भी नहीं होगा।

इन्हीं सब चीजों को देखते हुए भारत सरकार ने नागरिक संशोधन बिल लाने की योजना बनाई जिसमें धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत के 3 पड़ोसी देश अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हो रहे अत्याचारों की वजह से जो हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन आदि लोगों ने भारत का रुख किया है और कई सालों से भारत में रहने के बावजूद उन्हें शरणार्थी का ही दर्जा मिला हुआ है और तो और वह सभी भारत में भी रहमों करम पर ही जी रहे हैं जिन्हें किसी भी प्रकार का सुविधा से वंचित किया गया है वैसे लोगों को सम्मान से जीने का अधिकार दे रही है। अब दूसरी तरफ देखा जाए तो जो मुसलमान समुदाय के लोग भारत में रह रहे हैं क्या हम उन्हें शरणार्थी कह सकते हैं? क्या उनके साथ किसी भी प्रकार का उत्पीड़न हुआ होगा? जवाब आएगा बिल्कुल नहीं। अब ऐसे लोगों को शरणार्थी की जगह पर अतिथि कहा जाए या फिर जो लोग किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होने के बावजूद भारत में अपनी जमीन तलाश रहे हैं क्या उन्हें घुसपैठिया करार नहीं किया जाना चाहिए?

अब सवाल फिर से वही उठ रहा है कि आखिर इन सब के बावजूद हमारा देश क्यों जल रहा है क्यों उबल रहा है?


जिन लोगों को इस देश में सिर्फ इसलिए बुलाया गया या फिर लाया गया यह बता कर कि आपको हम सारी सुख सुविधा देंगे आपको सिर्फ हमें वोट देना है। इन सभी लोगों के साथ यह संशोधन बिल एक धोखे की तरह दिखाई दे रहा है। वर्तमान सरकार से पहले वाली सरकारों ने दूसरे देशों से मुसलमानों को लाकर उन्हें सारी सुविधाएं  सिर्फ इसलिए दी गई ताकि उनका वोट अपने पक्ष में किया जा सके और सत्ता पर काबिज हो सके।
अब आपको भी धीरे-धीरे यह समझ आने लगा होगा कि भारत सरकार के विपक्षी पार्टियां जिन्होंने उपरोक्त काम किया था उनके किए गए वादे और वोट दोनों का बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है। अपने इस नुकसान की भरपाई के लिए विपक्षी दल एकजुट होकर अपने वोट को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपने वोट को बचाने के लिए भारत के मुसलमानों को भी यह कह कर बरगला दीया की नागरिक संशोधन बिल आने की वजह से उनकी अपनी नागरिकता भी खतरे में आ गई है। जिन मुसलमान भाइयों ने 70 सालों से उन दलों  विश्वास किया है  कि वही उनके कर्णधार हैं, वही उनका भला और बुरा सोच सकते हैं, उन्होंने आसानी से उन बहरूपियों की बात सुन ली और निकल पड़े अपनी ही संपत्ति को खाक करने के लिए।

हमारे मुसलमान भाइयों को यह सोचना चाहिए था की कुछ भी हो आखिर इस देश की संपत्ति पर उनका भी उतना ही अधिकार है जितना की अन्य किसी भी समुदाय का। वे लोग इस देश की संपत्ति का नुकसान पहुंचा रहे हैं जिसकी भरपाई कहीं ना कहीं से इसी देश के लोगों को करना पड़ेगा।

अब बात करते हैं उन बुद्धिजीवियों का जिनका कहना है कि इस कानून की जरूरत अभी नहीं थी क्योंकि देश में गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी पहले से मौजूद है इसलिए पहले उन पर विचार करना चाहिए था।  इन सब विषयों पर ज़रा आप सोचिए की इस कानून के बाद भारत पर जो करोड़ों घुसपैठियों का बोझ था वह कम होगा या नहीं। करोड़ों लोग जो घुसपैठिए की तरह इस देश में बसे हुए थे और हमारे संसाधनों का उपभोग कर रहे थे अगर वह चले जाएंगे तो हमारे देश के संसाधन हमारे देशवासियों के लिए ही तो काम आएगा। हजारों नौकरियां जो उन घुसपैठियों को मिली हुई थी वह सभी नौकरियां हमारे लोगों को मिलेगी या नहीं। कुल मिलाकर देखा जाए तो यह नागरिक संशोधन कानून भारत की कई परेशानियों का हल है।

 ये घुसपैठिए जो अपने देश को छोड़कर आपके देश को जला रहे हैं क्या यह कभी भी आपकी देश की उन्नति में सहायक हो सकते हैं? जो लोग इस देश में इतने सालों तक रहने के बावजूद इस देश को जलाने के लिए आमादा हैं क्या ऐसे लोगों को इस देश में रहने का जरा सा भी अधिकार है? जो ना तो इस राष्ट्र को और ना ही इस जमीन को अपना मान पाए हैं और निकल पड़े हम भारतीयों के संपत्ति को जलाने के लिए वैसे लोग पहले भी इस देश के लिए तो नहीं ही जी रहे होंगे। अब जरा आप ही सोच कर बताइए ऐसे लोगों को इस देश में रहने का अधिकार है क्या ?

 आइए हम सभी भारतवासी चाहे वह हिंदू हो या फिर मुसलमान या फिर किसी और धर्म के लोग हो , अपने देश की संपत्ति को बचाने और इस नागरिक संशोधन बिल को सही तरीके से समाज के बीच में रखने के लिए निकले और राष्ट्र के हित में अपनी थोड़ी सी आहुति दें।

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राष्ट्र समर्पण एक राष्ट्र हित में समर्पित पत्रकार समूह के द्वारा तैयार किया गया ऑनलाइन न्यूज़ एवं व्यूज पोर्टल है । हमारा प्रयास अपने पाठकों तक हर प्रकार की ख़बरें निष्पक्ष रुप से पहुँचाना है और यह हमारा दायित्व एवं कर्तव्य भी है ।

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