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क्या भाजपा के सामने मध्यप्रदेश कांग्रेस ने टेके घुटने, अब कांग्रेस को क्यों याद आया हिन्दू?

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में हिंदुत्व भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए मुद्दा रहेगा। भाजपा तो हमेशा से हिंदुत्व एजेंडे वाली पार्टी है। सेकुलर छवि वाली कांग्रेस के लिए हिंदुत्व एजेंडे पर आना 2014 के बाद शुरू हुआ है। अब मध्यप्रदेश में तो कांग्रेस खुलकर हिंदुत्व का कार्ड खेलेगी।

 कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ हिंदुत्व कार्ड पर बहुत पहले से आ गए थे। उनके ताजा बयान – ‘भारत में 82 फीसदी हिंदू हैं और यह हिंदू राष्ट्र है ‘- पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आयीं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार मध्यप्रदेश जीतने के लिए कांग्रेस को जितना बड़ा हिंदुत्व कार्ड खेलना होगा, वह खेलेगी। उनका मानना है कि वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान में अब कोई दम नहीं रहा और अब जो लोकलुभावन योजनाएं ला रहे हैं, उनका कोई खास असर होने वाला नहीं है। दूसरे, कमलनाथ के लिए उनके राजनीतिक जीवन की यह आखिरी जंग है, जिसे वह हर हालत में जीतना चाहते हैं। लोक​प्रिय धर्मगुरु बाबा बागेश्वर की कथा का आयोजन कराना और उसमें पत्नी सहित जाकर उनका आशीर्वाद लेना भी कमलनाथ का चुनावी हिंदुत्व कार्ड ही है। विपक्षी दलों के गठबंधन के गले कमलनाथ का हिंदुत्व नहीं उतर रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद एल हनुमन्थैय्या कहते हैं ​कि कमलनाथ के पास वर्तमान परिस्थितियों में कोई विकल्प नहीं बचा है, क्योंकि भाजपा कांग्रेस को मुस्लिम के प्रति प्रेम रखने वाली और स्वयं को हिंदू हित और हिंदू कल्याण की पार्टी के रूप में प्रचारित और प्रसारित करती है। भाजपा अपने प्रयास में सफल भी हुई है, राजनीतिक लाभ भी मिला, लाभ ही क्यों, सत्ता भी मिल गयी। उसकी छवि हिंदू पक्षधर की बनी है। कांग्रेस के सामने अब अपनी हिंदू विरोधी छवि खत्म करके हिंदू हित वाले राजनीतिक दल के रूप में जनता के सामने नई छवि बनाने की चुनौती है। कमलनाथ उसी चुनौती से जूझ रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं के मंदिर जाने, जनेऊ पहनने और अन्य हिंदू मुद्दों की बात करने को भाजपा ढोंग बताती है। समय-समय पर भाजपा नेता राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका वाड्रा के मंदिर जाने और पूजा करने को चुनावी स्टंट बताते हैं। भाजपा के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी कहते हैं कि कांग्रेस कभी हिंदुत्व कार्ड खेलने में सफल नहीं हो सकती। नकली और असली में अंतर होता है। हमेशा अपने को सेकुलर कहने वाली कांग्रेस का हिंदुत्व कार्ड जनता स्वीकार नहीं करेगी। कांग्रेस के पास आज तक कोई अच्छा मुस्लिम जननेता नहीं है। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र जैन साफ शब्दों में कमलनाथ और कांग्रेस के हिंदू प्रेम को अल-तकिया (छल, ढोंग) की संज्ञा देते हैं। उनका कहना है कि इस्लाम में अल-तकिया का अर्थ है -धोखा देना। कांग्रेस हिंदुत्व की आड़ लेकर वोट की खातिर गिरगिट की तरह रंग बदल रही है। कांग्रेस के डीएनए में हिंदू विरोध है और भाजपा के डीएनए में हिंदुत्व है, एकात्म दर्शन है। यह वही कमलनाथ हैं जिन्होंने एक बार मौलवियों के बीच कहा था कि हम सब को मिलकर कोशिश करनी है कि हिंदू यानी भाजपा जीतने न पाए। डॉ. जैन ने कहा कि दिग्विजय सिंह भी नए अवतार में नजर आ रहे हैं। उनका यह कहना कि बजरंग दल पर रोक नहीं लगायी जाएगी, ही दिखाता है कि बजरंग दल पर रोक लगाने की उनकी औकात ही नहीं है। उधर, कांग्रेस अपने हिंदुत्व को मोहनदास कर्मचंद गांधी के हिंदुत्व के समान बताती है। हनुमन्थैय्या कहते हैं – गांधीजी का हिंदुत्व राम-रहीम और ईश्वर-अल्लाह का हिंदुत्व है, जिसमें दलित, ओबीसी, ईसाई और पारसी सब शामिल हैं। बजरंग दल का हिंदुत्व दलितों के लिए नहीं, केवल ब्राह्णणों के लिए है। कांग्रेस बजरंग दल नहीं, बल्कि महात्मा गांधी वाले हिंदुत्व के आधार पर वोट मांगेगी। लेकिन यह तय है कि हिंदू वोट के बिना कांग्रेस जीत नहीं सकती, इसलिए उनको हिंदुत्व का सहारा लेना होगा, साथ ही सामाजिक आर्थिक मुद्दों पर भी चुनाव प्रचार किया जाएगा।

कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में तो यह तय है कि गठबंधन की नाराज़गी की परवाह किए बिना कांग्रेस खुलकर हिंदुत्व कार्ड खेलेगी, उसे जिस हद तक जाना पड़ेगा, वह जाएगी। राम कथा करवानी पड़ेगी तो करवाएगी, बाबाओं के दरबार में मत्था टेकना पड़ेगा ताे टेकेगी। हर कीमत पर मध्य प्रदेश जीतने की कांग्रेस ने ठान ली है। उनको लगता है केवल एंटी इनकंबैसी ही काम नहीं करेगी, जादुई काम हिंदुत्व कार्ड करेगा।

साभार: सन्मार्ग

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