रामगढ़, 26 अक्टूबर: ब्रह्मर्षि परिषद के तत्वावधान में रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को रामगढ़ स्थित आशेश्वर सिंह ब्रह्मर्षि धर्मशाला के सभागार में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की जयंती धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष अजय मिश्रा ने की। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर की गई।
इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के जीवन, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. श्रीकृष्ण सिंह को श्रद्धापूर्वक ‘श्री बाबू’ के नाम से जाना जाता है। वे स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर राष्ट्रवादी नेता और कुशल प्रशासक थे। महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़कर उन्होंने देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता से पूर्व 1937 से 1946 तक उन्होंने बिहार में प्रधानमंत्री के तत्कालीन पदनाम पर कार्य किया। आजादी के बाद वे बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री बने। उनके कार्यकाल में औद्योगीकरण, शिक्षा, सिंचाई और सामाजिक सुधारों को बढ़ावा मिला। जमींदारी उन्मूलन जैसे ऐतिहासिक कदमों के माध्यम से उन्होंने सामाजिक एवं आर्थिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परिषद के जिला मीडिया प्रभारी सुरेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के अंदर देशभक्ति कूट-कूटकर भरी थी। उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रसेवा, सामाजिक न्याय और सुशासन के लिए समर्पित कर दिया। उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।
कार्यक्रम में सीपी संतन, रविंद्र शर्मा, मुकुंद कुमार तिवारी, गोपाल शरण राय, शैलेंद्र शर्मा, रणजीत सिंह, नवल किशोर शर्मा, रजनीकांत राय, सुशील कुमार, सत्येंद्र सिंह, संत कुमार सिंह, इंद्रजीत कुमार, ओमप्रकाश सिंह, बृजनंदन सिंह, भरत लाल, गोसाई, रामाशीष कुमार, ललकु कुमार, अशोक सिंह, अनिल कुमार शर्मा, भोलानाथ सिंह, हरेकृष्ण शर्मा, नीलकमल, धर्मेंद्र कुमार, विनय कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

