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बेटी को न्याय दिलाने के लिए चुनाव में:आरजी कर कांड पीड़िता की मां को भाजपा ने दिया विधानसभा टिकट, टीएमसी ने राज्य पक्ष की वकील को राज्यसभा भेजा

20260405 103040 | Rashtra Samarpan News

कोलकाता, 5 अप्रैल 2026। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप-मर्डर कांड एक बार फिर राजनीतिक घमासान का केंद्र बन गया है। भाजपा ने पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को उत्तर 24 परगना जिले की पानीहाटी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले में राज्य सरकार और तत्कालीन पुलिस कमिश्नर का प्रतिनिधित्व करने वाली वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी को राज्यसभा के लिए नामांकित किया है। इन फैसलों ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी है।

आरजी कर मामले में अगस्त 2024 को हुई 31 वर्षीय ट्रेनी डॉक्टर की बलात्कार के बाद हत्या ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था। मुख्य आरोपी सिविल वॉलंटियर संजय रॉय को जनवरी 2025 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। पीड़िता परिवार ने जांच में कवर-अप के आरोप लगाए थे और बड़े पैमाने पर आंदोलन हुए थे।

भाजपा ने 25 मार्च 2026 को अपनी तीसरी उम्मीदवार सूची में रत्ना देबनाथ का नाम शामिल किया। पानीहाटी टीएमसी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है, जहां से तृणमूल के तीर्थांकर घोष उम्मीदवार हैं। रत्ना देबनाथ ने कहा कि वे अपनी बेटी के न्याय और बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा के लिए राजनीति में आई हैं। उन्होंने टीएमसी पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया और कहा कि केवल सत्ता परिवर्तन से ही न्याय मिल सकता है। भाजपा इसे महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर टीएमसी सरकार को घेरने का बड़ा कदम बता रही है।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने फरवरी 2026 में वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया। मार्च में वे चुनी भी गईं और अब वे भारत की पहली खुलेआम एलजीबीटीक्यू+ सांसद बन गई हैं। मेनका गुरुस्वामी ने आरजी कर मामले में पश्चिम बंगाल सरकार और पूर्व पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल का प्रतिनिधित्व किया था। विपक्ष इसे “आरोपी पक्ष और प्रशासन का बचाव” बता रहा है, जबकि टीएमसी इसे संवैधानिक मूल्यों और कानूनी विशेषज्ञता से जोड़ रही है।

भाजपा नेताओं ने टीएमसी पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी ने आरजी कर कांड में पुलिस की लापरवाही को बचाने वाली वकील को पुरस्कृत किया है। वहीं, टीएमसी ने रत्ना देबनाथ के भाजपा जॉइन करने पर सवाल उठाते हुए इसे “राजनीतिक स्टंट” और “दोहरी बात” करार दिया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि पुलिस ने आरोपी को 24 घंटे में गिरफ्तार किया था और परिवार ने खुद सीबीआई जांच की मांग की थी।

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर तूफान मचा हुआ है। कई यूजर्स लिख रहे हैं कि भाजपा ने न्याय की मांग को चुनावी मैदान में लाकर सही कदम उठाया, जबकि टीएमसी ने राज्य पक्ष की वकील को ऊंचा पद देकर अपनी सोच साफ कर दी। कुछ इसे शुद्ध चुनावी रणनीति बता रहे हैं, जिसमें दोनों दल भावनाओं का फायदा उठा रहे हैं। पानीहाटी सीट अब हाई-प्रोफाइल हो गई है, जहां रत्ना देबनाथ की उम्मीदवारी ने महिला सुरक्षा और न्याय के मुद्दे को और तीखा कर दिया है।

विश्लेषकों का कहना है कि आरजी कर कांड अब कानूनी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक हथियार बन गया है। भाजपा इसे टीएमसी के 15 वर्षों के शासन में महिलाओं की असुरक्षा का प्रतीक बना रही है, जबकि तृणमूल इसे विपक्ष द्वारा भावनात्मक शोषण बता रही है। चुनाव नजदीक हैं, देखना होगा कि जनता इन फैसलों को किस नजरिए से देखती है- न्याय की लड़ाई या वोट की राजनीति।

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