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जांच एजेंसी के खिलाफ साहिबगंज में बंदी का आह्वान क्यों?

अब झारखंड में जांच एजेंसी के खिलाफ राजनीति शुरू हो गई है। जिस तरह से झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय (ED) रोज कहीं ना कहीं छापेमारी कर भ्रष्टाचार के मामले उजागर कर रही है इस हिसाब से झारखंड के भ्रष्टाचारियों में बौखलाहट नजर आ रही है। पिछले आठ समन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जांच एजेंसी के पास नहीं पहुंचे लेकिन अब जांच एजेंसियों के खिलाफ राजनीति शुरू होने लगी है।

ताजा मामला रांची के जमीन घोटाले से जुड़ा है। रांची जमीन घोटाला केस में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से ईडी की पूछताछ के खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने 17 जनवरी को साहिबगंज में बंद बुलाया है। साहिबगंज में मंगलवार की शाम को मशाल जुलूस निकाला गया। झामुमो जिलाध्यक्ष शाहजहां अंसारी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने रेलवे जनरल इंस्टीट्यूट से मशाल रैली निकाली और केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रोश जताया। रैली स्टेशन चौक, पटेल चौक, बाटा चौक, गांधी चौक, चौक बाजार, बड़ी धर्मशाला चौक, एलसी रोड, बादशाह चौक चौक पटेल चौक होते हुए वापस स्टेशन चौक पहुंची। पटेल चौक पर झामुमो के वरिष्ठ नेता हेमलाल मुर्मू ने कहा कि केंद्र की सरकार जनता की चुनी हुई हेमंत सोरेन की सरकार को अस्थिर करने में लगी है।

दूसरी तरफ झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सचिव सुप्रिया भट्टाचार्य ने भी जांच एजेंसियों पर निशाना सजाते हुए कहा कि झारखंड की जनता आक्रोशित है। अब इस आंदोलन से एक बात तो समझ में आ गई कि झारखंड की जनता से ज्यादा एक विशेष दल आक्रोशित है जिसके द्वारा साहिबगंज को बंद करने की घोषणा की गई है।

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