Sun. Jul 14th, 2024

अरुण कुमार सिंह

गत 9 जून की सायं श्री नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। यह कोई साधारण घटना नहीं थी। आज के पल-पल बदलते राजनीतिक माहौल में किसी नेता का लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनना, किसी आश्चर्य से कम नहीं है। इससे पहले केवल पंडित जवाहरलाल नेहरू लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बने थे। नेहरू के काल में विपक्ष बहुत ही बौना था। 24 घंटे के न्यूज चैनल भी नहीं थे और न ही सोशल मीडिया था। लेकिन आज परिस्थितियाँ बिल्कुल अलग हैं। आज हर व्यक्ति मोबाइल लेकर घूम रहा है और दुनियाभर की पल-पल की जानकारी रख रहा है। इस स्थिति में श्री नरेंद्र मोदी का तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने का अर्थ है कि लोग उनके कार्य को पसंद कर रहे हैं। लोग उन्हें और नेताओं से बिल्कुल अलग मानते हैं। यह अलग बात है कि श्री मोदी को 2014 और 2019 की अपेक्षा इस बार कुछ कम समर्थन मिला है। भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। फिर भी इस बार की जो जीत है, वह मोदी के चमत्कारी नेतृत्व के कारण मिली है।
लेकिन वहीं दूसरी तरफ यह भी कटु सत्य है कि इस बार बनारस के मतदाताओं ने श्री नरेंद्र मोदी को वह समर्थन नहीं दिया, जिसकी अपेक्षा समस्त हिंदू समाज को थी। मतगणना के दौरान श्री मोदी कई बार अपने प्रतिद्वंद्वी से पिछड़े भी। जिन मोदी के भरोसे भाजपा के अन्य नेता जीत दर्ज कर रहे हों, उन्हें अपने संसदीय क्षेत्र में पहले की अपेक्षा कम मत मिले। यह बात जंच नहीं रही है। भाजपा उस फैजाबाद संसदीय क्षेत्र में भी चुनाव हार गई, जहाँ अयोध्या है। वही अयोध्या जहाँ लगभग 500 वर्ष बाद श्री राम मंदिर बना है। इस मंदिर को बनवाने का श्रेय श्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को है। इसके बाद भी भाजपा वहाँ हार गई। मानते हैं कि भाजपा की ओर से कुछ गलतियाँ हुई होंगी, लेकिन इसका यह अर्थ तो नहीं है कि हम अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार लें। जिस सनातन समाज के लिए श्री मोदी दिन-रात काम कर रहे हैं, वह समाज कुछ स्वार्थी नेताओं के बहकावे और छलावे में आ गया, वह जातियों में बंट गया। इस प्रसंग ने एक बार फिर से स्मरण करा दिया कि हिंदू-बहुल होते हुए भी भारत क्यों 1,200 वर्ष तक मुसलमानों और अंग्रेजों का गुलाम रहा। 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री नरेंद्र मोदी ने 11 जून, 2014 को लोकसभा में अपना पहला भाषण दिया था। उन्होंने कहा था, ‘‘1,200 वर्ष की गुलामी की मानसिकता परेशान कर रही है। बहुत बार हमसे थोड़ा ऊँचा व्यक्ति मिले, तो सर ऊँचा करके बात करने की हमारी ताकत नहीं होती है।’’ प्रधानमंत्री के इस भाषण के बाद कुछ लोगों ने कई प्रश्न एक साथ ऽड़े किए थे। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जब 1,200 साल की गुलामी की बात कही तो उन्होंने आठवीं सदी में सिंध के हिंदू राजा दाहिरसेन पर हुए मीर कासिम के हमले (सन् 712) से लेकर 1947 तक के भारत को गुलाम बताया। भारत में अंग्रेजों का शासनकाल मोटे तौर पर 1757 से 1947 तक यानी 190 वर्ष रहा। इस हिसाब से गुलामी के बाकी लगभग 1,000 वर्ष भारत ने मुस्लिम शासकों के अधीन गुजारे।
मोहम्मद गोरी ने 1192 में पृथ्वीराज चौहान को हराकर भारत में मुस्लिम राज की नींव रखी थी। पृथ्वीराज चौहान भारत के अंतिम हिंदू शासक थे। जैसे आज श्री नरेंद्र मोदी को कुछ हिंदुओं ने ही हराया है, वैसे ही यह माना जाता है कि पृथ्वीराज चौहान भी एक हिंदू शासक जयचंद की गद्दारी से हारे थे। जयचंद कन्नौज का राजा था। कहा जाता है कि पृथ्वीराज चौहान द्वारा राजकुमारी संयोगिता का हरण करके कन्नौज से ले जाना जयचंद को ठीक नहीं लगा था। इसीलिए वह किसी भी कीमत पर पृथ्वीराज का विनाश चाहता था। इसलिए उसने मोहम्मद गोरी की सहायता करके पृथ्वीराज को समाप्त करने का मन बनाया। जयचंद ने सोचा कि इस तरह पृथ्वीराज भी समाप्त हो जाएगा और दिल्ली का राज्य उसको पुरस्कार-स्वरूप दे दिया जाएगा। देशद्रोही जयचंद की सहायता पाकर मोहम्मद गोरी तुरंत पृथ्वीराज से बदला लेने के लिए तैयार हो गया। 1192 ई- में एक बार फिर पृथ्वीराज और मोहम्मद गोरी की सेना तराइन के क्षेत्र में युद्ध के लिए आमने-सामने डट गई और दोनों ओर से भीषण युद्ध शुरू हो गया। इस युद्ध में पृथ्वीराज की ओर से लगभग 3,00,000 सैनिकों ने भाग लिया था, जबकि मोहम्मद गोरी के पास करीब 1,20,000 हजार सैनिक थे। लेकिन मोहम्मद गोरी की सेना की विशेष बात यह थी कि उसके पास शक्तिशाली घुड़सवार दस्ता था। इसके बावजूद पृथ्वीराज ने बड़ी ही आक्रामकता से गोरी की सेना पर आक्रमण किया, क्योंकि उस समय भारतीय सेना में हाथी के द्वारा सैन्य प्रयोग किया जाता था। लेकिन गोरी के घुड़सवारों ने आगे बढ़कर हिंदू सेना के हाथियों को घेर लिया और उन पर तीर वर्षा शुरू कर दी। जिससे घायल हाथी न तो आगे बढ़ पाए और न पीछे, बल्कि उन्होंने घबरा कर अपनी ही सेना को रौंदना शुरू कर दिया।
तराइन के द्वितीय युद्ध की सबसे बड़ी त्रसदी यह थी कि देशद्रोही जयचंद के संकेत पर हिन्ंदू सैनिक अपने ही हिंदू भाइयाें को मार रहे थे। परिणामस्वरूप इस युद्ध में पृथ्वीराज की हार हुई और उनको तथा राज कवि चंद बरदाई को बंदी बना लिया गया। देश और धर्मद्रोही जयचंद का इससे भी बुरा हाल हुआ और उसको मार कर मुसलमानों ने कन्नौज पर अधिकार कर लिया गया। पृथ्वीराज की हार से मोहम्मद गोरी का दिल्ली, कन्नौज, अजमेर, पंजाब सहित लगभग संपूर्ण भारतवर्ष पर अधिकार हो गया। और भारत में अगले 600 साल के लिए इस्लामी राज्य स्थापित हो गया।
आप मानें या मानें, 2024 में हिंदुओं ने फिर से एक बार वही गलती करने का प्रयास किया है, जो 1192 में कन्नौज के राजा जयचंद और अन्य हिंदू राजाओं ने की थी। इन लोगों ने पृथ्वीराज चौहान को हराने के लिए उस मोहम्मद गोरी का साथ दिया, जिसे पृथ्वीराज ने 1186 से 1191 तक अनेक बार हराया था। हारने के बाद मोहम्मद गोरी पृथ्वीराज से माफी माँग कर लौट जाता था। लेकिन 1191 में तराइन के युद्ध में जयचंद और अन्य हिंदू राजाओं के सहयोग से मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हरा दिया। इसके बाद वह उन्हें गजनी ले गया और उनकी आँखें फोड़ दी थीं। बाद में राज कवि चंद बरदाई की चतुराई से पृथ्वीराज ने मोहम्मद गोरी को शब्दभेदी बाण चलाकर मार दिया था। खैर, यह कहानी बड़ी लंबी है।
एक बार फिर से लौटते हैं वर्तमान में। इसमें कोई दो मत नहीं है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के कार्यकाल में देश हर तरह से आगे बढ़ा है। देश आर्थिक रूप से सशक्त हुआ है। बेघरों के लिए मकान के साथ शौचालय बन रहे हैं। 80 करोड़ लोगों को निःशुल्क अनाज मिल रहा है। भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है। इसके साथ ही देश में ढांचागत सुविधाएँ बढ़ रही हैं। रेलवे का विस्तार हो रहा है। राजमार्गों का जाल बिछ रहा है। विदेश नीति ऐसी है कि दुनिया के बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी श्री मोदी से मिलने के लिए लालायित रहते हैं। पहले अमेरिका, ब्रिटेन जैसे बड़े देश भारत और उसके प्रधानमंत्री को कोई महत्व नहीं देते थे, लेकिन आज अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन भी श्री मोदी को पीछे से बुलाकर उनसे मिलते हैं, उनके ऑटोग्राफ की माँग करते हैं। ऐसे दृश्य हर भारतीय को गर्व से भर देते हैं। इसके साथ ही सांस्कृतिक रूप से देश जाग रहा है। 500 वर्ष से जो राम मंदिर नहीं बन रहा था, उसे श्री मोदी ने बनवाया। इसके बावजूद भाजपा अयोध्या में हार गई। इस पर मंथन करना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ! बहुत सारे लोग बहुत कुछ कह रहे हैं। पर एक बात साफ दिखती है कि भाजपा के विरोधी हिंदुओं को जाति में बाँटने में सफल रहे। बता दें कि 2014 और 2019 में हिंदुओं ने जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर भाजपा को समर्थन दिया था। यही कारण है कि 2014 में भाजपा को 282 सीटें और 2019 में 303 सीटें मिली थीं। विपक्षी नेताओं को हिंदुओं की यही एकजुटता अपने अस्तित्व के लिए खतरे की घंटी लगने लगी। इसलिए उन्होंने हिंदुओं को बाँटने के लिए कई तरह की अफवाहें उड़ाईं। विपक्ष ने रट लगाना शुरू कर दिया कि भाजपा संविधान बदल देगी, भाजपा आरक्षण समाप्त कर देगी—। विपक्ष के इस झांसे में हिंदुओं का एक बड़ा वर्ग आ गया और उन्होंने जाति के आधार पर मतदान किया। वाराणसी के हिंदू मतदाताओं ने तो सारी हदें पार कर दीं। उनमें जाति और क्षेत्र का ऐसा जहर भर दिया गया कि उन्होंने एक ऐसे प्रधानमंत्री का भी मान नहीं रखा, जो निरंतर अपने लिए नहीं, देश के कार्य कर रहा है। हिंदुओं के इस व्यवहार से पता चलता है कि भारत वर्षों तक मुसलमानों और अंग्रेजों के अधीन क्यों रहा! ऐसा लगता है कि हिंदुओं को गुलामी ही पसंद है।
यह भारत के लिए दुर्भाग्य है कि हिंदू जाति में तुरंत बंट जा रहे हैं। हिंदुओं की आपसी फूट का लाभ देश विरोधी तत्व उठा रहे हैं। सैकड़ों वर्ष के बाद श्री नरेंद्र मोदी जैसा कोई हिंदू नेता भारत को मिला है। अपने कार्यों और व्यवहार से साफ बता रहे हैं कि वे किस दिशा में भारत को ले जाना चाहते हैं। इसके बाद भी शायद हिंदू समझ नहीं पा रहे हैं या फिर उन पर जाति का ऐसा नशा चढ़ा है कि उन्हें भविष्य के खतरों का पता ही नहीं चल रहा है। वहीं दूसरी ओर देश में एक ऐसा वर्ग है, जो बहुत ही चालाकी के साथ भाजपा को हराने लिए वोट करता है। उसकी रणनीति यह है कि चाहे जो भी दल भाजपा को हरा दे, उसे ही वोट करना है। यह वर्ग कथित महँगाई का रोना नहीं रोता है। उसे बेरोजगारी से भी कोई मतलब नहीं है। यह वर्ग केवल अपने मजहब को देखता है। इसके लिए वह कुछ भी त्याग करने को तैयार है। यह वर्ग सीएए का विरोध इसलिए कर रहा है कि उसे बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों को भारत में बसाना है। यह वर्ग जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने का विरोध इसलिए करता है कि उसे जम्मू-कश्मीर को मुसलमानों के लिए ‘सुरक्षित’ रखना है। वहाँ किसी दूसरे राज्य का व्यक्ति न बसे। इस वर्ग के कुछ लोग भारत पर इस्लामी झंडा फहराने के लिए मरने और मारने के लिए तैयार रहते हैं, जिन्हें आतंकवादी कहा जाता है। यह वर्ग समान नागरिक संहिता का विरोध इसलिए करता है कि वह चार निकाह कर सके। वहीं दूसरी ओर हिंदू उन नेताओं के झांसे में तुरंत फंस जा रहे हैं, जिनकी सोच सत्ता और अपने परिवार से दूर जा ही नहीं पाती है। ऐसे नेताओं को देश से कोई मतलब नहीं है। जो लोग जाति के नाम पर वोट करते हैं, उन्हें यह बोलने का कोई अधिकार नहीं है कि देश में विकास नहीं हो रहा है, सड़कें अच्छी नहीं हैं, अस्पतालों में सुविधाएँ नहीं हैं, बिजली नहीं मिल रही है, रोजगार नहीं है — आदि आदि।
ऐसे लोगों के लिए केवल इतना कहना शेष रह गया है कि मोदी जी, हमें आपके कार्यों से कुछ लेना-देना नहीं है। हमें तो केवल जाति के उम्मीदवार चाहिए और कुछ मुफ्त की रेवड़ी। देश भांड़ में जाए।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

अरुण कुमार सिंह

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