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राष्ट्रीय संगोष्ठी में छात्रों की कम उपस्थिति पर उठे सवाल, छात्र नेता ने जताई चिंता

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रामगढ़, 31 मई: रामगढ़ महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान छात्रों की नगण्य उपस्थिति को लेकर छात्र नेता नितेश कुमार मोदी ने महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि लगभग छह हजार विद्यार्थियों वाले महाविद्यालय में राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक आयोजन में छात्रों की अपेक्षित भागीदारी नहीं होना चिंताजनक है और यह संस्थान तथा विद्यार्थियों के बीच बढ़ती दूरी का संकेत देता है।

नितेश कुमार मोदी ने कहा कि संगोष्ठी में विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रॉक्टर, छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष, रामगढ़ के उपायुक्त, उप विकास आयुक्त सहित कई शिक्षाविद और गणमान्य अतिथि मौजूद थे, इसके बावजूद छात्रों की संख्या बेहद कम रही। उनके अनुसार यह केवल एक कार्यक्रम की विफलता नहीं, बल्कि महाविद्यालय के शैक्षणिक माहौल की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि महाविद्यालय में नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था का अभाव विद्यार्थियों की घटती उपस्थिति का प्रमुख कारण बन रहा है। नए छात्र प्रारंभ में उत्साह के साथ महाविद्यालय आते हैं, लेकिन समय पर कक्षाओं का संचालन नहीं होने, आधारभूत सुविधाओं की कमी और छात्र-हितैषी वातावरण के अभाव के कारण उनकी रुचि धीरे-धीरे कम हो जाती है।

छात्र नेता ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान का उद्देश्य केवल नामांकन बढ़ाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को शैक्षणिक, सांस्कृतिक और नेतृत्व विकास के अवसर उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने दावा किया कि महाविद्यालय में छात्रों को पर्याप्त मंच और प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है, जिससे उनमें निराशा का माहौल बन रहा है।

उन्होंने महाविद्यालय प्रशासन से छात्र गतिविधियों को बढ़ावा देने, छात्र-शिक्षक संवाद को मजबूत करने, नियमित कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित करने तथा आधारभूत सुविधाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। साथ ही राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) से संबंधित प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता लाने की आवश्यकता भी बताई।

नितेश कुमार मोदी ने चेतावनी दी कि यदि छात्रहित से जुड़े मुद्दों की लगातार अनदेखी की गई, तो छात्र समुदाय लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए महाविद्यालय प्रशासन को विद्यार्थियों का विश्वास जीतने और उन्हें परिसर की गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में गंभीर पहल करनी होगी।

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