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रामगढ़, 4 अप्रैल 2026: राधा गोविंद विश्वविद्यालय, रामगढ़ में JEE Main अप्रैल सत्र की परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले एक गंभीर परीक्षा कदाचार साजिश का भंडाफोड़ हुआ है। विश्वविद्यालय के कंप्यूटर लैब में सिस्टम में छेड़छाड़ कर चुनिंदा छात्रों को फायदा पहुंचाने की रचनात्क योजना सामने आई। इस घोटाले में विश्वविद्यालय का एक कर्मचारी दिनेश कुमार महतो मुख्य आरोपी बन गया है, जिसने कुछ हजार रुपये के लालच में गिरोह के साथ मिलीभगत की।

घटना के अनुसार, गिरोह के सदस्य दिनेश कुमार महतो की मिलीभगत से विश्वविद्यालय की कंप्यूटर लैब में घुसकर मॉनिटर और कंप्यूटर सिस्टम बदलने की कोशिश कर रहे थे। प्रत्येक मॉनिटर बदलने के बदले आरोपी कर्मचारी को 10 हजार रुपये देने का सौदा तय हुआ था। यह पूरी साजिश JEE Main परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी करने की तैयारी का हिस्सा थी, जो मध्यमवर्गीय परिवारों के मेहनती छात्र-छात्राओं के भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती थी।

साजिश तब उजागर हुई जब विश्वविद्यालय के सतर्क शिक्षकेत्तर कर्मचारी उमेश कुमार साव ने लैब के आसपास संदिग्ध गतिविधियां देखीं। जब कुछ लोग कंप्यूटर के उपकरणों को एक फॉर्च्यूनर कार में लादकर ले जाने की कोशिश कर रहे थे, तब कर्मचारियों की तीखी नजर ने पूरे रैकेट को पकड़ लिया। उमेश कुमार साव ने तुरंत कैंपस इंचार्ज संजीव कुमार सिंह को सूचना दी, जिन्होंने इसकी जानकारी तुरंत कुलसचिव निर्मल कुमार मंडल को दी।

खबर मिलते ही कुलसचिव निर्मल कुमार मंडल ने सभी काम छोड़कर विश्वविद्यालय पहुंचे और तुरंत रामगढ़ पुलिस को सूचित किया। रामगढ़ थाने में इस मामले में FIR दर्ज कराई गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी कर्मचारी दिनेश कुमार महतो और बिहार निवासी सूरज कुमार सिंह को घटनास्थल से गिरफ्तार कर लिया। कुछ अन्य आरोपी मौके से भागने में सफल रहे।

पुलिस ने मौके से 70 मॉनिटर, 3 राउटर, 1 CPU, 4 मोबाइल फोन और 1 फॉर्च्यूनर वाहन जब्त किया है। रामगढ़ पुलिस ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।

इस घटना के बाद परीक्षा आयोजक TCS ने तुरंत एक्शन लिया और राधा गोविंद विश्वविद्यालय केंद्र के सभी परीक्षार्थियों को रांची स्थित अन्य सुरक्षित केंद्रों पर शिफ्ट कर दिया गया है। JEE Main 2026 अप्रैल सत्र की परीक्षा 2 से 8 अप्रैल तक निर्धारित है।

यह घटना शिक्षा क्षेत्र में लालच और भ्रष्टाचार की गंभीर समस्या को उजागर करती है। एक कर्मचारी की लालच ने पूरे विश्वविद्यालय की साख पर सवालिया निशान लगा दिया। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन और ईमानदार कर्मचारियों उमेश कुमार साव, संजीव कुमार सिंह तथा कुलसचिव निर्मल कुमार मंडल की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के कारण बड़े पैमाने पर गड़बड़ी को रोका जा सका।

इस घटना से सभी परीक्षा केंद्रों को सबक लेना चाहिए कि सुरक्षा व्यवस्था और निरंतर निगरानी कितनी जरूरी है। आशा है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी, ताकि भविष्य में ऐसे घोटालों की पुनरावृत्ति न हो और ईमानदार छात्रों का भविष्य किसी की लालच का शिकार न बने।

राधा गोविंद विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वास जताया है कि इस प्रकार की घटनाएं भविष्य में नहीं होंगी और परीक्षा प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न होगी।

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