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भारत में पांव पसारता बौद्धिक आतंकवाद : #Intellectual_Terrorist

लेख : रितेश कश्यप
Twitter @meriteshkashyap

भारत में बौद्धिक आतंकवाद चरम सीमा पर है और इसमें हमारे बॉलीवुड के लोग, मीडिया और लेखक जैसे लोग काफी अधिक सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। इनका काम है अपने लेखन और फिल्मों के माध्यम से समाज के बीच एक ऐसा संदेश दिया जाय जिससे समाज को पूरी तरह से बांटा जा सके। एक तरह से इन्हें प्रशिक्षण देने वाले वो हैं जिन्होंने 200 सालों तक इस देश को बांट कर राज किया है।

हैशटैग स्मार्टफोन में आप और हम

आज के इंटरनेट और 4G के युग में स्मार्टफोन और वायरल चीजों का बोलबाला है जहां सोशल मीडिया,वीडियो पोर्टल एवं कई वीडियो एप एक ऐसा प्लेटफार्म है जहां आसानी से बौद्धिक आतंकवाद की खेती की जा सकती है। इसके तहत आम लोग उन तथाकथित बुद्धिजीवियों के चारा बनकर उनके एजेंडे में जानबूझकर या गलती से फंस जा रहे हैं।आज के इस पूंजीवादी व्यवस्था में सभी लाभ कमाने की होड़ में लगे हैं। भले वो लाभ किसी देश की संस्कृति पर हमला कर मिले या फिर अपने ही देश के रक्षकों को भक्षक दिखाकर।

लैला : हिन्दू सभ्यता पर प्रहार

कोरोना वायरस की वजह से पूरे देश मे लॉक डाउन कर दिया गया। समय काटने के लिए  नेटफ्लिक्स और ZEE 5 सब्सक्रिप्शन ले लिया  ताकि कुछ फिल्मों को देख देखकर समय काटा जा सके।  इसी दौरान नेटफ्लिक्स में एक लैला नाम सीरीज आया था काफी नाम सुन रखा था इस सीरीज का। यह एक उपन्यास पर आधारित सीरिज थी जो पूर्व मंत्री एमजे अकबर के पुत्र एवं वरिष्ठ पत्रकार प्रयागराज अकबर द्वारा लिखा गया था। जब वो सीरीज खत्म हुई तो यही समझ में आया कि यह पूरी सीरीज में एक जेहादी सोच को प्रदर्शित करने का कुत्सित प्रयास है। इस उपन्यास और वीडियो सीरीज के माध्यम से यह बताया जा रहा है कि भविष्य में हिंदू अतिवादी हो जाएंगे, जात पात का भेदभाव चरम सीमा पर होगा, अन्य धर्मों के प्रति हिंदू धर्म का भेदभाव अपनी पराकाष्ठा पार कर चुका होगा। उपन्यासकार को वर्तमान के कट्टरपंथी देश और वहां के लोगों के साथ होते अत्याचार को दरकिनार कर या यूं कहिये उसपर से आपकी नजरें हटाकर एक ऐसी संस्कृति पर हमला करने की कोशिश है जिसने पूरे विश्व को शांति का संदेश और सदा ,
“वसुधैव कुटुंबकम” की ही बात की है। इस तरह के उपन्यास और वीडियो बनाने के पीछे मानसिकता सिर्फ यही है कि अपनी बौद्धिक आतंकवादी हमले से समाज को विभक्त कर अपनी सोच थोप दिया जाए। वर्तमान के भारत में हिंदू समाज जहां पूरी तरह से एकजुट और एकता दिखाने में लगी हुई है वहीं हिंदू विरोधी ताकतें हिंदुओं के बीच मतभेद डालने का कोई भी प्रयास विफल नहीं होने देना चाहेगी। चाहे इसके लिए किसी भी हद तक जाना क्यों न पड़ जाए। इस बात में भी कोई संशय नही की हिन्दू समाज मे कई कुरीतियां मौजूद थे, यह समाज कई जातियों में विभक्त था। मगर आज के इस स्मार्ट युग मे ये भेदभाव खत्म होते जा रहे हैं। और इन सब का कारण आधुनिकता ही है। अब यही आधुनिकता ही समाज को विभक्त करने का फिर प्रयास कर रही है। कुल मिलाकर इस सीरीज के माध्यम से हिन्दू संस्कृति को धूमिल करने का भरपूर प्रयास किया गया है।

Code M : भारतीय सेना को दलित विरोधी दिखाने घटिया प्रयास

अब अगर बात करेंगे दूसरे वीडियो पोर्टल zee5 की तो उसमें भी एक वीडियो सीरीज काफी चर्चित हो रहा है जिसका नाम कोड एम है। इस वीडियो सीरीज को कोई भी व्यक्ति अगर देखेगा तो वह आसानी से भारतीय सेना के प्रति नफरत का भाव पैदा कर लेगा। अब भारत का कौन सा ऐसा व्यक्ति है जो भारतीय सेना को दुर्भावना से देखना पसंद करेगी और जो ऐसी दुर्भावना डालने का प्रयास कर रहा है उसके अंतर्मन में क्या चल रहा होगा यह अपने आप में विचारणीय प्रश्न है। इस वीडियो श्रृंखला के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि भारतीय सेना जात पात और छुआछूत को इतना मानती है कि अपने बेहतरीन ऑफिसर जो दलित समुदाय से आता है उस की भी हत्या करने से नही चुकती। हत्या का कारण यह होता है कि वह जांबाज ऑफिसर अपने वरिष्ठ अधिकारी के पुत्री से प्रेम करता है और यह बात ऊंची जात का वरिष्ठ अधिकारी को नागवार गुजरती है और वह छोटी जात के जांबाज ऑफिसर हत्या करवा देता है। साथ ही यह भी दिखाने का प्रयास किया गया है कि भारतीय सेना के द्वारा इस हत्या को छुपाने के लिए मासूम मुसलमानों को आतंकवादी बताकर उनकी भी हत्या कर दी जा रही है। इस कहानी के बारे में मैंने गहन पड़ताल की तो पता चला यह मात्र एक कल्पना है और कल्पना के आधार पर इस फिल्म के निर्देशक एवं लेखक ने भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम को कटघरे में खड़ा कर दिया और उनके राष्ट्र हितेषी छवि को धूमिल किया गया।

युद्ध आरम्भ है , देखना यह कि जीतेगा कौन ?

 उक्त बातों को लेकर ही यह कहा जा सकता है कि भारत में अब युद्ध की घड़ी है जिसमें है हर एक व्यक्ति को कई प्रकार के आतंकवाद से लड़ना होगा। इस तरह के बौद्धिक आतंकवाद को भी हल्के में नही लिया जा सकता क्योंकि बौद्धिक हमला आपके दिलो दिमाग पर किया जाता है। बौद्धिक आतंकी एक तरह से पूरे समाज का ब्रेन वाश करने का काम करते हैं जो अपने आप मे हर तरह के आतंकवाद से भी ज्यादा गंभीर परिणाम लाने वाले हैं। इन सब के पीछे एक भावना काम कर रही है और वो यह है कि आम आदमी भी अपने देश के सबसे भरोसेमंद संस्थान और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” वाली भारतीय संस्कृति के ऊपर सवालिया निशान खड़ा करे।

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