लोहरदगा, 04 जुलाई: झारखंड के लोहरदगा जिले के हाटी ग्राम सभा ने गांव में धर्मांतरण के उद्देश्य से आयोजित होने वाली कथित “चंगाई सभा” पर स्थायी रोक लगाने का निर्णय लेते हुए एक सूचना पट्ट स्थापित किया है। ग्राम सभा द्वारा लगाए गए इस सूचना पट्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि पादरी, पास्टर तथा अन्य व्यक्ति धर्मांतरण के उद्देश्य से गांव में प्रवेश नहीं करेंगे और इस प्रकार की गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले को ग्रामीणों ने अपनी धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और ग्राम स्वाभिमान की रक्षा के संकल्प के रूप में प्रस्तुत किया है।
ग्राम सभा का कहना है कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 25 तथा पेसा (PESA) कानून के तहत ग्राम सभाओं को प्राप्त अधिकारों की भावना के अनुरूप लिया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भी कुछ मामलों में ग्राम सभा के अधिकारों और सूचना पट्ट से जुड़े निर्णयों को मान्यता दी है। हालांकि, इन दावों का विशिष्ट संदर्भ और उनकी वर्तमान कानूनी स्थिति स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सकी है।
गांव के लोगों के अनुसार इस पहल में सनातनी परिवारों ने सरना समाज का सहयोग किया है और इसे “सरना-सनातन एकता” का उदाहरण बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आने वाले समय में झारखंड के अन्य गांवों में भी इसी प्रकार की सूचना पट्टियां लगाई जाएंगी ताकि पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक व्यवस्था का संरक्षण किया जा सके।
इस निर्णय को लेकर सामाजिक और कानूनी स्तर पर चर्चा तेज होने की संभावना है, क्योंकि धर्म की स्वतंत्रता, ग्राम सभा के अधिकार और धर्मांतरण जैसे विषय संवैधानिक एवं विधिक दृष्टि से संवेदनशील हैं।

