Fri. Apr 10th, 2026

पॉलिथीन मुक्त बने समाज , इसके लिए रामगढ़ के पर्यावरण विद को किया गया सम्मानित

IMG 20260410 WA0003 | Rashtra Samarpan News

रांची, 10 अप्रैल 2026: सेंटर फॉर एनवायरमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (CEED) द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘एकम डायलॉग संवाद से निर्माण’ में कल रेडिसन ब्लू होटल, रांची में चार राज्यों के 27 चेंजमेकर्स को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में पद्म श्री सम्मानित पर्यावरणविद् और ‘वाटर मैन’ राजेंद्र सिंह की प्रमुख उपस्थिति रही। बिहार, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से आए 27 पर्यावरण कार्यकर्ताओं और चेंजमेकर्स को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

इस दौरान पॉलिथीन दान अभियान के कार्य को विशेष सराहना मिली। अभियान के माध्यम से पॉलिथीन मुक्त समाज निर्माण में किए जा रहे निरंतर प्रयासों को मान्यता दी गई।

रामगढ़, झारखंड के उपेन्द्र पांडे और उनकी पत्नी सोना पांडे को भी इस कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।

सम्मान प्राप्त करने वाले उपेंद्र पाण्डे ने कहा:- “यह सम्मान सिर्फ हमारा नहीं, बल्कि उन सभी समर्पित कार्यकर्ताओं का है जो पॉलिथीन मुक्त समाज बनाने के लिए तहे दिल से लगे हुए हैं।”

कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों को प्रोत्साहित करना तथा विभिन्न राज्यों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना था।

CEED के इस प्रयास को पर्यावरण प्रेमियों ने सराहा और उम्मीद जताई कि ऐसे कार्यक्रम भविष्य में और बड़े स्तर पर आयोजित किए जाएंगे।

जानिए रामगढ़ के पर्यावरण विद् उपेंद्र पांडे क्या कर रहे हैं!

उपेंद्र पांडे रामगढ़ (झारखंड) में प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ एक अनोखी और प्रेरणादायक मुहिम चला रहे हैं। वे पॉलिथीन के कुप्रभाव को कम करने के लिए लोगों से प्लास्टिक इकट्ठा करते हैं और उसके बदले उन्हें फूलों के पौधे देकर हरियाली फैलाने का संदेश देते हैं।

उनका यह अभियान “कूड़े के बदले हरियाली” की सोच पर आधारित है। लोग अपने घरों से पॉलिथीन लेकर उनके पास आते हैं और बदले में उनकी नर्सरी से पौधे लेकर जाते हैं। खास बात यह है कि उनकी नर्सरी का कोई भी पौधा बिक्री के लिए नहीं होता, बल्कि पॉलिथीन की मात्रा के अनुसार वे छोटे या बड़े पौधे लोगों को देते हैं।

उपेंद्र पांडे पेशे से एक कोचिंग शिक्षक हैं और अपने घर के अहाते में ही उन्होंने नर्सरी तैयार की है। इस अभियान में उनके कोचिंग के बच्चे भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और पौधों की देखभाल में सहयोग करते हैं। उनके इस प्रयास में समाज के हर वर्ग—खासतौर पर मजदूर, माली और घरेलू कामगार—का अच्छा सहयोग मिल रहा है।

पिछले छह वर्षों से चल रहे इस अभियान के जरिए वे इतनी प्लास्टिक इकट्ठा कर चुके हैं कि एक पूरा कमरा भर गया है, जिसे वे रिसाइक्लिंग के लिए भेजने की योजना बना रहे हैं। उनका सपना है कि देश में इस्तेमाल होने वाला हर प्लास्टिक रिसाइकिल हो, ताकि एक स्वच्छ और सुंदर भारत का निर्माण हो सके।

उनकी यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि समाज को यह भी सिखाती है कि छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

Related Post

एक नजर इधर भी

error: Content is protected !!