रांची, 2 अप्रैल 2026: एडमिशन सीजन शुरू होते ही झारखंड के निजी विद्यालयों में किताबों, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी के नाम पर मनमानी वसूली का सिलसिला तेज हो गया है। स्कूल प्रबंधन और पब्लिशरों की मिलीभगत से अभिभावकों पर महंगे दामों का बोझ लद रहा है, जबकि बाजार में समान किताबें 30-50 प्रतिशत सस्ती उपलब्ध हैं।
रांची और जमशेदपुर समेत राज्य के कई जिलों में अभिभावक परेशान हैं। कई स्कूल 8 से 15 हजार रुपये तक सिर्फ किताबों, कॉपियों और यूनिफॉर्म में वसूल रहे हैं। स्कूल परिसर में ही किताबों की बिक्री हो रही है या विशिष्ट दुकानों से खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। बाहर से सामान लाने पर एडमिशन प्रक्रिया में दिक्कत का डर दिखाया जा रहा है।
रांची जिला प्रशासन ने मार्च 2026 में उपायुक्त मंजुनाथ भजंतरी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय फीस निर्धारण एवं जांच समिति गठित की थी। इस समिति को फीस वृद्धि, किताब-यूनिफॉर्म बिक्री और मनमानी पर सख्त कार्रवाई का अधिकार दिया गया है। उल्लंघन पर 50 हजार से 2.50 लाख रुपये तक जुर्माना और गंभीर मामलों में स्कूल की मान्यता रद्द करने की चेतावनी दी गई है।
समिति के निर्देश साफ हैं स्कूल परिसर में किताबें, यूनिफॉर्म, जूते या अन्य सामग्री की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। अभिभावकों को किसी खास दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। जमशेदपुर में भी शिक्षा विभाग ने 78 निजी स्कूलों को नोटिस जारी किए थे, जहां फीस वृद्धि और तय दुकानों से किताब खरीदने की शिकायतें मिली थीं। स्कूली शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
बिहार प्राइवेट स्कूल्स- फीस रेगुलेशन एक्ट, 2019 की धारा 4(6) के तहत अभिभावकों को खुले बाजार से किताबें खरीदने की पूरी स्वतंत्रता है। पटना समेत कई जिलों में डीएम ने सख्त आदेश जारी किए थे, लेकिन एडमिशन सीजन में इनकी अनदेखी हो रही है।
आने वाले दो महीनों में झारखंड के हजारों अभिभावक इस बोझ तले दबेंगे। मध्यम वर्गीय परिवारों की कमाई का बड़ा हिस्सा शिक्षा पर खर्च हो रहा है, जबकि शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल बरकरार हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा को व्यापार बनाने वाली यह प्रथा गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर रही है।
अभिभावकों के द्वारा झारखंड सरकार से मांग कि गई है कि रांची, जमशेदपुर समेत सभी जिलों में इन आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और उल्लंघनकर्ता स्कूलों पर त्वरित कार्रवाई हो।
बच्चे का भविष्य महंगी किताबों पर नहीं, गुणवत्तापूर्ण और सस्ती शिक्षा पर टिका है। अभिभावक जागरूक हों, एकजुट हों और आवाज उठाएं तभी इस गोरखधंधे पर अंकुश लग सकता है।

