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बजरंग दल फिर सुर्खियों में, धुर्वा से लापता मासूम भाई-बहन अंश-अंशिका 13 दिन बाद बजरंग दल की मदद से सकुशल बरामद

प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक चित्र

रांची, 14 जनवरी 2026: झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र अंतर्गत मल्लार टोली, मौसीबाड़ी से 2 जनवरी को रहस्यमय तरीके से लापता हुए 5 वर्षीय अंश कुमार राय और 4 वर्षीय अंशिका कुमारी नामक सगे भाई-बहन को 13 दिनों के लंबे इंतजार के बाद मकर संक्रांति के पावन अवसर पर सकुशल बरामद कर लिया गया है। यह खबर पूरे राज्य में राहत और खुशी की लहर लेकर आई है।

पुलिस के अनुसार, दोनों मासूम बच्चे 2 जनवरी को घर के पास से बिस्किट खरीदने निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। परिवार ने तुरंत धुर्वा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस ने 40 सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया। जांच में हजारों मोबाइल नंबरों की छानबीन, 2,000 से अधिक CCTV फुटेज का विश्लेषण और डॉग स्क्वॉड का उपयोग किया गया। पूरे राज्य में अलर्ट जारी किया गया और सूचना देने वालों के लिए लाखों रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।

मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तूल पकड़ा। विभिन्न संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन किए, धुर्वा में बंद का आह्वान हुआ और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी झारखंड पुलिस से रिपोर्ट मांगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपहरणकर्ताओं पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी और जांच को तेज करने के निर्देश दिए।

बरामदगी में रामगढ़ जिले के चितरपुर क्षेत्र में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की सक्रियता सराहनीय रही। चितरपुर के संयोजक सचिन प्रजापति, डबलू साहू, सन्नी सहित अन्य सदस्यों ने संदिग्ध परिस्थितियों में घूमते एक दंपति के साथ दोनों बच्चों को देखा। उन्होंने तुरंत बच्चों की पहचान की, उनके माता-पिता को फोन कर सूचना दी और पुलिस को भी अवगत कराया।

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बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बच्चों को सुरक्षित रखा और पुलिस के हवाले किया। रांची और रामगढ़ पुलिस की संयुक्त टीम ने चितरपुर के पहाड़ी इलाके में छापेमारी कर दोनों बच्चों को बरामद किया। मौके से एक महिला और पुरुष को गिरफ्तार किया गया, जो खुद को पति-पत्नी बताकर बच्चों को छिपा रहे थे। प्रारंभिक जांच में यह मानव तस्करी से जुड़ा गिरोह प्रतीत हो रहा है।

बजरंग दल रामगढ़ जिला मंत्री छोटू वर्मा ने कहा कि समाज में संकट के समय बजरंग दल हमेशा सबसे आगे खड़ा होता है। पूरे झारखंड में उनके कार्यकर्ता बच्चों की तलाश में जुटे थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं का धन्यवाद देते हुए कहा कि इसी तरह क्षेत्र, राज्य और राष्ट्र की सेवा जारी रहेगी।

13 दिनों की चिंता, डर और आंसुओं के बाद बच्चों के सुरक्षित मिलने की खबर परिजनों तक पहुंचते ही घर में खुशी और राहत का माहौल बन गया। लोग इसे मकर संक्रांति का चमत्कार बता रहे हैं। पूरे इलाके में बजरंग दल के युवाओं की खुले दिल से सराहना हो रही है। लोग कह रहे हैं कि मुश्किल हालात में इन युवाओं ने इंसानियत को जिंदा रखा।

झारखंड पुलिस, बजरंग दल के कार्यकर्ताओं और समाज के सहयोग से मासूमों की जान बचाने वाली यह घटना एक मिसाल बन गई है।

 

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