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डा वाकणकर ने देश के इतिहास को प्राचीन साबित करने का काम किया

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पद्मश्री डा वाकणकर की जन्म शताब्दी पर होंगे कई कार्यक्रम

रांची, 25 सितंबर
संस्कार भारती देश के प्रख्यात चित्रकार एवं संस्थापक महामंत्री पद्मश्री डॉ विष्णु श्रीधर वाकणकर की जन्म शताब्दी मना रही है। पूरे देश में मौजूद करीब 1450 विभिन्न इकाइयों के माध्यम से जन्म शताब्दी वर्ष पर कई कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। पद्मश्री डॉ वाकणकर न केवल प्रख्यात चित्रकार थे बल्कि देश के कई भागों के साथ-साथ विदेशों में भी 4000 शैल चित्रों को खोजने का काम किया। संगठन के प्रदेश मंत्री संगठन शाद्वल कुमार ने कहा कि इनकी सबसे बड़ी उपलब्धि भीमबेटका को खोज निकालना है। साथ ही डॉक्टर वाकणकर ने अन्य कई इतिहासकारों व समाज में काम करने वाले सदस्यों के साथ मिलकर सरस्वती नदी के प्रवाह को खोज निकालने में भी सफलता प्राप्त की। सरस्वती नदी के प्रवाह को खोज निकालना भारतीय इतिहास की बड़ी घटना है। अब तक यह माना जा रहा था कि भारतीय सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता एवं मोहनजोदड़ो से जुड़ी हुई है और इसका कालखंड करीब 3000 ईस्वी पूर्व से 700 ईस्वी पूर्व के आसपास माना जाता था, लेकिन सरस्वती नदी के प्रवाह की खोज होने से सरस्वती नदी घाटी सभ्यता या वैदिक सभ्यता को सही साबित करने में सफलता मिली। इसके कारण भारत के पुरातन इतिहास में कई बदलाव आए। सबसे बड़ा बदलाव आर्य द्रविड़ की थ्योरी को धक्का लगने के रुप में सामने आया। पाश्चात्य इतिहासकार मानते थे कि आर्य बाहर से आए हुए थे और इस देश पर आक्रमण करने का काम किया, किंतु सरस्वती नदी से जुड़ी वैदिक सभ्यता के प्रमाण मिलने से यह निश्चित हो गया कि आर्य यहीं के लोग थे और यहीं से सरस्वती नदी के विलुप्त होने पर यहां से मध्य एशिया और बाहर के देशों में भी गए। सरस्वती नदी के प्रवाह की खोज होने पर वैदिक सभ्यता का उद्भेदन करने में सफलता मिली। अब तक पाश्चात्य इतिहासकार वेदों को उचित स्थान नहीं देते थे लेकिन वेदों में वर्णित सरस्वती नदी के प्रवाह की खोज ने इसे विश्व की प्राचीनतम सभ्यता होने एवं वेदों का अस्तित्व होने को भी प्रमाणित किया। स्वाभाविक है कि डा वाकणकर की खोज ने भारत की वैदिक सभ्यता को न केवल प्राचीन बताया,  बल्कि यह भी साबित हुआ कि इस सभ्यता ने सभी क्षेत्रों में उच्च कोटि के मानक तय किया। यही कारण है कि देश के लोगों को डा वाकणकर के कार्यों को जानना चाहिए। इसी दिशा में संस्कार भारती ने एक छोटा सा प्रयास शताब्दी वर्ष में करने का निर्णय लिया है।
डा वाकणकर जन्म शताब्दी वर्ष के प्रदेश संयोजक शिवाजी क्रांति ने कहा कि संस्कार भारती कि सभी इकाइयों को सहयोग करने हेतु सभी जिलों में आयोजन समिति कि एक छोटी इकाई का गठन किया जाएगा तथा कुल 21 प्रकार के कार्यक्रम झारखण्ड के सभी जिलों में करने कि योजना बनी है जिसमें प्रमुख रूप से धरोहर यात्राएं, पुरातत्व स्थल यात्राएं, भीमबेटका दर्शन, वृत चित्र निर्माण, भारत की शैल चित्रकला पर लघु फ़िल्म निर्माण, डॉक्टर वाकणकर जी के जीवन कृति पर नाटक, डॉक्टर, वाकणकर सम्मान, डॉक्टर वाकणकर जन्मशताब्दी स्मारिका प्रकाशन, चित्रकथा का प्रकाशन, परिचय व संवाद कार्यक्रम, प्राचीन गृह सम्पदा का अवलोकन, राज्य के सभी 5 सरकारी विश्वविद्यालयों में संस्कार भारती द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया जाना निश्चित किया गया है। साथ ही निजी विश्वविद्यालय में भी ऐसे ही कार्यक्रम तय किए जाएंगे। ऐसा होने पर युवा पीढ़ी को न केवल डा वाकणकर की विश्व को देन के बारे में जानकारी मिलेगी, बल्कि उन्हें भारतीय इतिहास की प्राचीनता व उन्नत सभ्यता की भी जानकारी मिलेगी। यह भी निर्णय लिया गया कि छोटे बच्चों के बीच रंग भरो प्रतियोगिता के माध्यम से उन्हें भी भारतीय सभ्यता के उन्नत और श्रेष्ठ होने की जानकारी मिलेगी। पुरातत्व दर्शन के कार्यक्रम के तहत भोपाल के भीम बेटका सहित देश के अन्य पुरातात्विक स्थलों का भी दर्शन कराया जाएगा। इसी के तहत झारखंड के पुरातात्विक स्थलों यथा बड़कागांव के इस्को गुफा, मलूटी मंदिर, पारसनाथ, बेनी सागर, पलामू का लिखलाही पहाड़, पालकोट स्थित पम्पापुरी पर्वत, इटखोरी, टांगीनाथ आदि    असुर जनजाति के कर्म स्थल से लेकर कई अन्य स्थलों का भी दर्शन कराया जाएगा। और तो और जनजातीय कलाकारों एवं नवोदित युवा कलाकार संगम की योजना भी बनाई गई है। सभी प्रमंडलों में सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश के ख्याति प्राप्त सिने कलाकारों को आमंत्रित किए जाने की योजना पर काम चल रहा है। झारखण्ड के धरोहरों एवं पुरातत्व स्थलों का अभी तक संरक्षण पोषण करने वाले स्थानीय समाज का आभार व्यक्त करते हुए सम्मान करने की योजना। इसके अलावा भी जिला स्तर पर कई छोटे छोटे कार्यक्रम की योजना बनाई गई है। पत्रकार वार्ता में प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष उमेश चंद्र मिश्र, महानगर अध्यक्ष रामानुज पाठक, उपाध्यक्ष आशुतोष प्रसाद सहित कई अन्य उपस्थित थे।

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